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हम सब जानते हैं कि जिंदगी बेहद कठिन है। हमारे लक्ष्य और सपनों को लेकर बनाई गई बेहतरीन योजनाएँ अक्सर धरी-की-धरी रह जाती हैं

हम सब जानते हैं कि जिंदगी बेहद कठिन है। हमारे लक्ष्य और सपनों को लेकर बनाई गई बेहतरीन योजनाएँ अक्सर धरी-की-धरी रह जाती हैंहम सब जानते हैं कि जिंदगी बेहद कठिन है। हमारे लक्ष्य और सपनों को लेकर बनाई गई बेहतरीन योजनाएँ अक्सर धरी-की-धरी रह जाती हैं। इस लिहाज से, हर शख्स के अंदर दो गुण अवश्य होने चाहिए, जो उसकी इच्छा और सफलता की चाहत में शुरू हुए सफर को जारी रख सके। ये दो गुण हैं-वचनबद्धता और दृढ़ता। आपके अंदर लक्ष्य पर खुद को केंद्रित रखने को लेकर उचित वचनबद्धता और उस दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहने की निरंतरता बरकरार रहनी चाहिए। इसके बाद आपके अंदर दृढ़ता होनी चाहिए, जो सफलता के सफर में आपके जीवन में निश्चित रूप से आनेवाली परेशानियों और झटकों से निपटने में आपकी, मदद करे।   #new

तलवे चाटना: एक अद्भुत कला या खेल व्यवस्था पर कलंक

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"तलवे चाटना: एक अद्भुत कला या खेल व्यवस्था पर कलंक?" ✍️ लेखक - किशोर प्रजापति  भारत में खेलों की दुनिया दिन-ब-दिन आगे बढ़ रही है। एथलीट्स अंतरराष्ट्रीय पदक ला रहे हैं, देश का नाम रोशन कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे एक ऐसा काला सच छिपा है, जिस पर आज भी चर्चा करना एक ‘जोखिम’ जैसा लगता है। हम बात कर रहे हैं – ‘तलवे चाटने’ की संस्कृति की, जिसे आप चाहें तो "Yes Man स्पोर्ट्स स्किल" कह सकते हैं। 🎭 तलवे चाटना: एक कला, एक रणनीति, एक अनकहा सत्य यह कहना गलत नहीं होगा कि आजकल कई जगहों पर खेल कौशल से ज़्यादा संबंध कौशल मायने रखने लगा है। मैदान में कड़ी मेहनत करने वाले खिलाड़ियों को किनारे किया जाता है। जबकि 'सर, नमस्ते' और 'सब बढ़िया है सर' कहने वाले चेहरों को मंच, मीडिया और मैडल मिल जाते हैं। एक नया वर्ग बन गया है, जो खेल का अभ्यास नहीं करता, बल्कि "संबंधों की गर्मी" से पसीना बहाता है। इसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे ‘तलवे चाटना’ एक अनौपचारिक खेल इवेंट है—जिसका अभी तक बस मंत्रालय की सूची में नाम नहीं जुड़ा। 📉 खिलाड़ियों की असली चुनौती: विरोध ...

5वीं इंडिया इंटरनेशनल किक बॉक्सिंग टूर्नामेंट, दिल्ली में भीनमाल के खिलाड़ियों की ऐतिहासिक उपलब्धि

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 दिल्ली में आयोजित 5वीं इंडिया इंटरनेशनल किक बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भीनमाल के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भीनमाल से भाग लेने वाले तीन खिलाड़ियों में से धनुष्री सोलंकी एवं यज्ञा जैन ने उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय देते हुए कांस्य पदक प्राप्त किया। यह उपलब्धि भीनमाल सहित पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता उनके निरंतर परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है। सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाया और यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। इस सफलता के पीछे कोच किशोर प्रजापति का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने खिलाड़ियों को तकनीकी प्रशिक्षण, मानसिक मजबूती और प्रतियोगी भावना के साथ तैयार किया। उनके मार्गदर्शन में संचालित ज्वाला टेम्पल ऑफ मार्शल आर्ट लगातार क्षेत्र की प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने का कार्य कर रही है। अकादमी का उद्देश्य केवल पद...