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मार्शल आर्ट की हत्या: क्या हम 'खेल' के नाम पर एक प्राचीन विद्या को खो रहे हैं?

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लेखक: किशोर प्रजापति  संस्था: ज्वाला टेम्पल ऑफ मार्शल आर्ट (Jwala Temple Of Martial Art) आदरणीय सरकार और खेल नीति निर्धारकों, आज मैं एक मार्शल आर्ट कोच के रूप में, एक ऐसे कड़वे सच को सामने रखना चाहता हूँ जिसे अक्सर मेडल और ट्राफियों की चमक के पीछे छुपा दिया जाता है। यह गुजारिश सिर्फ़ मेरी नहीं, बल्कि उस हर सच्चे साधक की है जिसने अपनी जवानी के 15-20 साल इस कला को सीखने में खपा दिए हैं। मेरी सरकारों से एक सीधी और स्पष्ट माँग है: कृपया 'मार्शल आर्ट' को 'खेलों' (Sports) की श्रेणी से बाहर निकाल दीजिए और मार्शल आर्ट को बचा लीजिए। समस्या क्या है? आज हम एक अजीब दौर में जी रहे हैं। गली-गली में मार्शल आर्ट अकादमियाँ खुल रही हैं, लेकिन वहां मार्शल आर्ट नहीं, सिर्फ 'खेल' सिखाया जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज 17 या 18 साल का एक लड़का खुद को 'मार्शल आर्ट कोच' कह रहा है। जरा सोचिए, जिस विद्या को समझने में, जिसके दर्शन (Philosophy) को जीने में और जिसके तकनीकों में पारंगत होने में एक व्यक्ति को कम से कम 15 साल की तपस्या लगती है, वहां एक कल का बच्चा ...

राजस्थान में खेलों की मान्यता पर सवाल — जब भारत के पूर्व खेल मंत्री के राज्य में ही खिलाड़ी बेमान्यता के शिकार

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राजस्थान में खेलों की मान्यता पर सवाल — जब भारत के पूर्व खेल मंत्री के राज्य में ही खिलाड़ी बेमान्यता के शिकार हमारा ब्लॉग देखे किशोर प्रजापति भारत जैसे विशाल राष्ट्र में खेल न केवल शारीरिक क्षमता का प्रतीक हैं, बल्कि एकता, अनुशासन और राष्ट्रगौरव का प्रतीक भी हैं। लेकिन आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि  जिस खेल को भारत सरकार मान्यता देती है, वह राजस्थान में “बिना मान्यता” का शिकार कैसे हो गया? क्या यह केवल एक प्रशासनिक भूल है, या खिलाड़ियों के भविष्य से किया गया अन्याय?  जब केंद्र मान्यता देता है, तो राज्य क्यों नहीं मानता? भारत सरकार के युवा एवं खेल मंत्रालय ने देशभर में अनेक खेलों को आधिकारिक मान्यता दे रखी है  इनमें वे खेल भी शामिल हैं जिनमें राजस्थान के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं। फिर सवाल उठता है  अगर वही खेल भारत स्तर पर मान्य है, तो राजस्थान में उसे "गैर-मान्यता प्राप्त" कहकर खिलाड़ियों का भविष्य क्यों रोका जा रहा है? क्या राजस्थान भारत से अलग कोई व्यवस्था चला रहा है? या फिर यह राज्य की खेल नीतियों में किसी गहरी असमानता ...

भारतीय खेल: राजनीति और भ्रष्टाचार की कैद में

 

गुंजन सोढा का राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता हेतु चयन

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गुंजन सोढा का राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता हेतु चयन जिले का करेंगी प्रतिनिधित्व रायपुर, छत्तीसगढ़ में भीनमाल (जालोर): जालोर जिले की होनहार खिलाड़ी गुंजन सोढा का चयन आगामी राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए हुआ है, जो रायपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित की जाएगी। गुंजन इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में Above 21 आयु वर्ग के 56 किलो भार वर्ग के किक लाइट इवेंट में जालोर जिले का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस संबंध में जानकारी जिला किक बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष श्री वचनाराम राजपुरोहित ने दी। उन्होंने बताया कि गुंजन ने अपने निरंतर अभ्यास, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उनके चयन से जिले के खेल जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई है और यह जिले के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक क्षण है। गुंजन सोढा पूर्व में भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं और अब राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करने को तत्पर हैं। आज गुंजन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रायपुर रवाना हुईं, जहां पर उनका आत्मविश्वास, खेल भावना और समर्पण जिले को गौरवान्वित करने क...

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़: एक प्रेरणा की मिसाल

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कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़: एक प्रेरणा की मिसाल कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भारतीय सेना के एक सम्मानित अधिकारी, ओलंपिक पदक विजेता और समाजसेवी के रूप में एक प्रेरणा बने हुए हैं। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और उत्कृष्टता से भरा हुआ है, जिसने उन्हें न केवल खेल जगत, बल्कि सेना और राजनीति में भी अपनी महत्वपूर्ण पहचान दिलाई। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का जन्म 1970 में जयपुर, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल से प्राप्त की और इसके बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद, राठौड़ ने अपनी शारीरिक और मानसिक मजबूती को साबित किया और भारतीय सेना में एक महान अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाई। खेल करियर: ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का खेल करियर अत्यधिक प्रेरणादायक है। उन्होंने शॉटगन शूटिंग में अपनी अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया और 2004 के एथेंस ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल था, क्योंकि उन्होंने अपनी श्रेणी में भारत को ओलंपिक में दूसरा स्थान दिलवाय...