प्राचीन ग्रंथों में अस्त्रों से बचाव की तकनीकें उतनी ही उन्नत बताई गई हैं जितने कि स्वयं अस्त्र थे। इसे 'प्रत्यस्त्र' (Counter-Astra) या रक्षात्मक युद्धनीति कहा जाता था।
प्राचीन ग्रंथों में अस्त्रों से बचाव की तकनीकें उतनी ही उन्नत बताई गई हैं जितने कि स्वयं अस्त्र थे। इसे 'प्रत्यस्त्र' (Counter-Astra) या रक्षात्मक युद्धनीति कहा जाता था। यह केवल ढाल के पीछे छिपना नहीं था, बल्कि यह आने वाली ऊर्जा (तरंग) को दूसरी ऊर्जा से काटकर बेअसर करने का विज्ञान था। यहाँ कुछ प्रमुख प्राचीन रक्षा तकनीकें और उनकी आधुनिक विज्ञान से तुलना दी गई है: 1. प्रत्यस्त्र सिद्धांत (The Concept of Interceptors) युद्ध में नियम था कि हर अस्त्र का एक "काट" (Counter) होता था। एक विशिष्ट आवृत्ति (Frequency) की तरंग को शांत करने के लिए विपरीत प्रकृति की तरंग छोड़ी जाती थी। * वरुणास्त्र बनाम आग्नेयास्त्र : जब कोई आग्नेयास्त्र (Fire/Heat weapon) चलाता था, तो उसे रोकने के लिए वरुणास्त्र (Water/Cooling weapon) का प्रयोग होता था। * आधुनिक तुलना : यह आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400 या Iron Dome) जैसा है। जैसे ही रडार दुश्मन की मिसाइल (ऊर्जा) को आते देखता है, वह उसे हवा में ही नष्ट करने के लिए अपनी 'एंटी-मिसाइल' छोड़ देता है। 2. ब्...