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जब इनकीं शादी हो रही थी तब लगभग सारे भारत के लोगो ने इनकीं हँसी उड़ाई थी कि *पैसा बोलता है

जब इनकीं शादी हो रही थी तब लगभग सारे भारत के लोगो ने इनकीं हँसी उड़ाई थी कि *पैसा बोलता है* आज इनका टेलेन्ट देखिये । पहली बार सुनी इनकी स्पीच, इतना धाराप्रवाह बोलने वाले अनंत अम्बानी का भाषण, शब्दों का चयन काबिले तारीफ  अविश्वसनीय, विस्मरणीय है #anantambani  #अनंतअम्बानी

#इमरजेंसी की इकलौती वजह क्या हाईकोर्ट का फैसला था ?

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#इमरजेंसी की इकलौती वजह क्या हाईकोर्ट का फैसला था ?                                                      इलाहाबाद हाईकोर्ट अपना फैसला दे चुका था। अब सबकी निगाहें इंदिराजी के अगले कदम पर थीं। विपक्ष इस्तीफे का दबाव बढ़ा रहा था। तो समर्थक चुनाव में मिले विपुल जनादेश का हवाला दे रहे थे। दिल्ली के साथ ही पड़ोसी राज्यों से आने वाले या फिर लाये जाने वाले हुजूम 1,सफदरजंग पर जुटकर मरने-मिटने की कसमें खा रहे थे। वफ़ादारी की होड़ में पार्टी नेता और राज्यों के मुख्यमंत्री सब शामिल थे। किसी कड़े कदम की #आहट थी। पर वह क्या होगा ? क्या यह हालात सिर्फ 12 जून के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की देन थे ? वापस लौटते हैं। याद करते हैं 15 अगस्त 1947 की आधी रात की। तब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश की आजादी की घोषणा की थी। उस रात देश सोया नहीं था। सूरज जल्दी झांका था। अगली सुबह उम्मीद और उल्लास के नए उजाले के साथ आयी थी। 28 वर्ष के अंतराल पर। 25 जू...

सादगी की मिसाल: जब भारत के राष्ट्रपति की बेटी ने गुमनामी में निभाया अपना कर्तव्य

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सादगी की मिसाल: जब राष्ट्रपति की बेटी ने गुमनामी में निभाया अपना कर्तव्य आज के दौर में जहाँ जरा सी शक्ति या पद मिलते ही लोग उसका प्रदर्शन करने से नहीं चूकते, वहीं हमारे बीच कुछ ऐसे भी व्यक्तित्व हैं जो ऊँचे पदों पर रहकर भी ज़मीन से जुड़े रहे। यह कहानी है पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी की सुपुत्री स्वाति कोविंद की, जिन्होंने अपनी पहचान उजागर किए बिना वर्षों तक एक साधारण कर्मचारी की तरह काम किया। विदेशी प्रशंसा बनाम भारतीय वास्तविकता अक्सर हमारा मीडिया पश्चिमी देशों के उदाहरणों की खूब चर्चा करता है। हमें याद है कि जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की बेटी एक रेस्टोरेंट में काम कर रही थीं, तो भारतीय मीडिया सहित दुनिया भर ने उनके संस्कारों की सराहना की थी। निश्चित रूप से, वह तारीफ के काबिल था। लेकिन विडंबना यह है कि हमारे अपने देश में भी संस्कारों की ऐसी ही एक गौरवशाली मिसाल मौजूद थी, जिससे दुनिया लंबे समय तक अनजान रही। कौन हैं स्वाति कोविंद? लगभग 5.4 फीट की कद-काठी वाली स्वाति कोविंद कई वर्षों से एयर इंडिया में एक फ्लाइट अटेंडेंट (क्रू मेंबर) के रूप में कार...

Self-Defense या सिर्फ दिखावा? एक सीधी बात

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सुनने में थोड़ा कड़वा लगेगा, लेकिन कहना ज़रूरी है। आजकल “Self-Defense” के नाम पर जो सिखाया जा रहा है, उसमें से काफी चीजें असल में Self-Defense नहीं हैं। वो सिर्फ दिखावा है… या यूं कहें कि कैमरे के लिए बनाई गई एक्टिंग है। आपने भी देखा होगा— एक आदमी धीरे-धीरे हाथ बढ़ाता है, दूसरा आराम से उसका हाथ पकड़ता है, फिर 3-4 स्टेप में उसे गिरा देता है। सब कुछ इतना साफ और smooth होता है कि देखने वाले को लगता है—“बस, यही सीखना है।” लेकिन एक सवाल है— क्या असली हमलावर भी ऐसे ही आएगा असली दुनिया में क्या होता है? सड़क पर, किसी गली में, या अचानक हुए हमले में— कोई आपको पहले से बताता नहीं है कोई धीरे-धीरे हमला नहीं करता और सबसे जरूरी—कोई आपके साथ cooperate नहीं करता वहाँ सब कुछ उल्टा होता है। हमला अचानक होता है, तेज होता है, और कई बार एक से ज्यादा लोग भी हो सकते हैं। आपको सोचने का मौका तक नहीं मिलता। तो फिर सवाल उठता है— जो चीजें हम इतनी आराम से सीख रहे हैं, क्या वो उस हालत में काम आएंगी यहाँ सबसे बड़ा धोखा होता है समस्या ये नहीं है कि लोग कुछ सीख रहे हैं। समस्या ये है कि लोग गलत चीज को सही सम...

जब शासक सलाह नहीं सुनता: रावण, धृतराष्ट्र और ट्रम्प की कहानी

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इतिहास और पौराणिक ग्रंथ हमें बार-बार एक ही सीख देते हैं जब सत्ता में बैठा व्यक्ति अपने बुद्धिमान सलाहकारों की बात नहीं सुनता, तो विनाश तय होता है। रामायण में रावण ने विभीषण की सलाह ठुकराई, और महाभारत में धृतराष्ट्र ने विदुर की बातों को नजरअंदाज किया। नतीजा क्या हुआ? दोनों ही मामलों में साम्राज्य का पतन। आधुनिक उदाहरण: डोनाल्ड ट्रम्प आज के समय में यही पैटर्न हमें आधुनिक राजनीति में भी देखने को मिलता है। डोनाल्ड ट्रम्प का कार्यकाल इसका एक ताजा उदाहरण बनता जा रहा है। जून में आने वाली किताब Regime Change: Inside the Imperial Presidency of Donald Trump जिसे जोनाथन स्वान और मैगी हैबरमैन ने लिखा है, उसमें ट्रम्प के फैसलों के अंदर की कहानी सामने आती है। कैसे लिया गया युद्ध का फैसला किताब के अनुसार, 11 फरवरी को बेंजामिन नेतन्याहू व्हाइट हाउस पहुंचे। उन्होंने ट्रम्प को एक विस्तृत योजना दी— ईरान पर अचानक हमला, नेतृत्व को खत्म करना, और कुछ ही हफ्तों में सत्ता परिवर्तन। यह योजना सुनने में जितनी आकर्षक थी, उतनी ही जोखिम भरी भी। सलाहकारों ने क्या कहा? ट्रम्प की टीम में बैठे अन...

जब राम की निकटता पाने के लिए हनुमान ने पूरे शरीर पर लगा लिया सिंदूर

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रामायण के अनंत प्रसंगों में हनुमान जी की भक्ति के कई रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन 'सिंदूर' वाला यह प्रसंग उनकी मासूमियत और प्रभु के प्रति उनके अनन्य प्रेम की पराकाष्ठा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जब भक्ति चरम पर होती है, तो तर्क और पांडित्य गौण हो जाते हैं। एकांत की मर्यादा और हनुमान का तर्क लंका विजय के पश्चात अयोध्या में उत्सव का माहौल था। श्रीराम का राज्याभिषेक हो चुका था। दरबार की व्यस्तताओं के बाद जब श्रीराम अपने निजी कक्ष में माता सीता और अपने भाइयों के साथ विश्राम के लिए आए, तो हनुमान जी भी उनके पीछे-पीछे चले आए। परिवार के अन्य सदस्य चाहते थे कि श्रीराम और माता सीता को कुछ समय एकांत में मिले। शत्रुघ्न जी ने संकेतों में हनुमान जी को जाने का आग्रह किया, लेकिन राम-नाम में रमे हनुमान भला मामूली संकेतों को कहाँ समझने वाले थे। अंततः जब उन्हें स्पष्ट कहा गया कि प्रभु को 'एकांत' चाहिए, तो हनुमान जी ने बड़ी मासूमियत से पूछा— "माता सीता भी तो यहीं हैं, फिर मुझे ही क्यों जाना चाहिए?" एक चुटकी सिंदूर का रहस्य तब शत्रुघ्न जी ने उन्हें समझा...

मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार

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मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार  नासा आर्टेमिस 2: वो मिशन जो इंसानी कदमों को चांद के और करीब ले जाएगा इंसानियत एक बार फिर सितारों को छूने की दहलीज पर है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर खड़ा दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट एसएलएस यानी स्पेस लॉन्च सिस्टम दहाड़ने के लिए तैयार है। यह सिर्फ एक रॉकेट नहीं, बल्कि अरबों लोगों के सपनों की उड़ान है। आर्टेमिस 2 क्यों खास है? यह मिशन अपोलो युग की यादों को ताजा करने वाला है, लेकिन नई तकनीक और नए जज्बे के साथ। 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा के इतने करीब जाएगा। 322 फीट ऊंचे इस रॉकेट की ताकत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि यह लॉन्च के वक्त लाखों पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है। यह मिशन आर्टेमिस 3 के लिए रिहर्सल है, जिसमें इंसान वास्तव में चांद की सतह पर उतरेगा। अंतरिक्ष के चार जांबाज इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होंगे। ये वो लोग हैं जो भविष्य के मंगल मिशन की राह आसान करेंगे। इसमें पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री चांद की यात्रा कर इतिहास रचेंगे। घर बैठे कै...