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जब राम की निकटता पाने के लिए हनुमान ने पूरे शरीर पर लगा लिया सिंदूर

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रामायण के अनंत प्रसंगों में हनुमान जी की भक्ति के कई रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन 'सिंदूर' वाला यह प्रसंग उनकी मासूमियत और प्रभु के प्रति उनके अनन्य प्रेम की पराकाष्ठा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जब भक्ति चरम पर होती है, तो तर्क और पांडित्य गौण हो जाते हैं। एकांत की मर्यादा और हनुमान का तर्क लंका विजय के पश्चात अयोध्या में उत्सव का माहौल था। श्रीराम का राज्याभिषेक हो चुका था। दरबार की व्यस्तताओं के बाद जब श्रीराम अपने निजी कक्ष में माता सीता और अपने भाइयों के साथ विश्राम के लिए आए, तो हनुमान जी भी उनके पीछे-पीछे चले आए। परिवार के अन्य सदस्य चाहते थे कि श्रीराम और माता सीता को कुछ समय एकांत में मिले। शत्रुघ्न जी ने संकेतों में हनुमान जी को जाने का आग्रह किया, लेकिन राम-नाम में रमे हनुमान भला मामूली संकेतों को कहाँ समझने वाले थे। अंततः जब उन्हें स्पष्ट कहा गया कि प्रभु को 'एकांत' चाहिए, तो हनुमान जी ने बड़ी मासूमियत से पूछा— "माता सीता भी तो यहीं हैं, फिर मुझे ही क्यों जाना चाहिए?" एक चुटकी सिंदूर का रहस्य तब शत्रुघ्न जी ने उन्हें समझा...

मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार

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मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार  नासा आर्टेमिस 2: वो मिशन जो इंसानी कदमों को चांद के और करीब ले जाएगा इंसानियत एक बार फिर सितारों को छूने की दहलीज पर है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर खड़ा दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट एसएलएस यानी स्पेस लॉन्च सिस्टम दहाड़ने के लिए तैयार है। यह सिर्फ एक रॉकेट नहीं, बल्कि अरबों लोगों के सपनों की उड़ान है। आर्टेमिस 2 क्यों खास है? यह मिशन अपोलो युग की यादों को ताजा करने वाला है, लेकिन नई तकनीक और नए जज्बे के साथ। 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा के इतने करीब जाएगा। 322 फीट ऊंचे इस रॉकेट की ताकत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि यह लॉन्च के वक्त लाखों पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है। यह मिशन आर्टेमिस 3 के लिए रिहर्सल है, जिसमें इंसान वास्तव में चांद की सतह पर उतरेगा। अंतरिक्ष के चार जांबाज इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होंगे। ये वो लोग हैं जो भविष्य के मंगल मिशन की राह आसान करेंगे। इसमें पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री चांद की यात्रा कर इतिहास रचेंगे। घर बैठे कै...

MI vs KKR: रोहित-रिकेल्टन का तूफान, बुमराह-शार्दुल का मैजिक... मुंबई इंडियंस की जीत के 5 कारण

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MI vs KKR: रोहित-रिकेल्टन का तूफान, बुमराह-शार्दुल का मैजिक मुंबई इंडियंस की जीत के 5 बड़े कारण इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में रविवार को मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच रोमांचक मुकाबला खेला गया। इस मैच में मुंबई इंडियंस ने 6 विकेट से शानदार जीत दर्ज की। साल 2012 के बाद यह पहला मौका है जब मुंबई इंडियंस ने अपने पहले ही मैच में जीत हासिल की है। आइए जानते हैं इस शानदार जीत के 5 मुख्य कारण: 1. रोहित शर्मा की तूफानी बल्लेबाजी रोहित शर्मा ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज़ अपनाया। उन्होंने मात्र 23 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और 38 गेंदों में 78 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 6 छक्के लगाए और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। रोहित और रिकेल्टन के बीच पहले विकेट के लिए 148 रनों की साझेदारी मैच का टर्निंग पॉइंट रही। 2. रिकेल्टन की दमदार पारी रेयान रिकेल्टन ने टीम में मौका मिलते ही खुद को साबित किया। उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 43 गेंदों में 81 रन बनाए, जिसमें 8 छक्के शामिल थे। रोहित के आउट होने के बाद उन्होंने जिम्मेदारी संभाली और टीम को जी...

ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट: शक्ति, अनुशासन और आत्मरक्षा का संगम

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ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट: शक्ति, अनुशासन और आत्मरक्षा का संगम आज के बदलते परिवेश में जहाँ सुरक्षा और आत्मविश्वास जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं, मार्शल आर्ट्स का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाती है। इसी उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया है — 'ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट', जो समाज में आत्मरक्षा और अनुशासन की एक नई दिशा प्रदान कर रहा है। एक नया आयाम और अगला स्तर (Our Mission) ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट का मुख्य उद्देश्य मार्शल आर्ट्स को एक नया आयाम देना और इसे अगले स्तर (Next Level) पर स्थापित करना है। हमारा लक्ष्य इस प्राचीन और गौरवशाली विधा को केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित न रखकर, इसे एक पेशेवर और वैज्ञानिक पद्धति के रूप में विकसित करना है। हम मार्शल आर्ट्स की परिभाषा को आधुनिक तकनीकों और गहरी आध्यात्मिक समझ के साथ जोड़कर इसे एक ऐसी ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं, जहाँ हर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार हो। ...

मधु किश्वर से स्नूपगेट तक: आरोप, राजनीति और सच्चाई का पूरा विश्लेषण

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मधु किश्वर जी ने ब्रांड मोदी के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन उन्हें कोई #प्रसाद नहीं मिला।   मधु किश्वर का गुस्सा होना बनता था, लेकिन इस हद तक below the belt.....?? वो विरोधी बन गईं। इन्होंने ब्रांड मोदी को बहुत बनाया लेकिन इन्हें कुछ नहीं मिला तो अब डीब्रांड करने में जुट गई हैं! मोदी की दाद देनी होगी। मौन रहकर इन्हें और स्वामी को चित्त कर रखा है।  बोलते रहो। राजनीति में #मौन भी कम मारक हथियार नहीं होता। नरसिंहा राव साहब ने इसका खूब इस्तेमाल किया। आतंकवादी दरगाह में घुस गए और लगे प्रेशर बनाने। राव साहब चुप रहे। पड़े रहो सालों। एक दिन उबिया कर आतंकी सब छोड़छाड़ कर भाग गए! मोदी भी इसी दांव से अपने पार्टी के आंतरिक आतंकियों के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। बोलते रहो। लिखते रहो। मधु किश्वर के आरोप निराधार और #बिलो_द_बेल्ट लगते हैं।  ऐसे ही #एक_पुराने मामले के संदर्भ में chat GPT से जानकारी मांगी गई, तो उसका कहना था कि वह मामला थोड़ा जटिल है। सोशल मीडिया पर अक्सर आधे-अधूरे या गलत दावों के साथ फैलाया जाता है। इसे आमतौर पर “गुजरात स्नूपिंग कांड” या “...

आपकी ज़िंदगी में ऐसा कौन सा लम्हा या इंसान है जिसकी आप सबसे ज़्यादा कदर करते हैं? हमें कमेंट्स में बताएं।"

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      आपकी ज़िंदगी में ऐसा कौन सा लम्हा या इंसान है जिसकी आप सबसे ज़्यादा कदर करते हैं?      हमें कमेंट्स में बताएं।" #Rishte #Kadar #Feelings #Humanity #TrueLines #EmotionalPost #HeartTouching#LifeLessons #HindiQuotes #AppreciateWhatYouHave #ValuingTime

मार्शल आर्ट की हत्या: क्या हम 'खेल' के नाम पर एक प्राचीन विद्या को खो रहे हैं?

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लेखक: किशोर प्रजापति  संस्था: ज्वाला टेम्पल ऑफ मार्शल आर्ट (Jwala Temple Of Martial Art) आदरणीय सरकार और खेल नीति निर्धारकों, आज मैं एक मार्शल आर्ट कोच के रूप में, एक ऐसे कड़वे सच को सामने रखना चाहता हूँ जिसे अक्सर मेडल और ट्राफियों की चमक के पीछे छुपा दिया जाता है। यह गुजारिश सिर्फ़ मेरी नहीं, बल्कि उस हर सच्चे साधक की है जिसने अपनी जवानी के 15-20 साल इस कला को सीखने में खपा दिए हैं। मेरी सरकारों से एक सीधी और स्पष्ट माँग है: कृपया 'मार्शल आर्ट' को 'खेलों' (Sports) की श्रेणी से बाहर निकाल दीजिए और मार्शल आर्ट को बचा लीजिए। समस्या क्या है? आज हम एक अजीब दौर में जी रहे हैं। गली-गली में मार्शल आर्ट अकादमियाँ खुल रही हैं, लेकिन वहां मार्शल आर्ट नहीं, सिर्फ 'खेल' सिखाया जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज 17 या 18 साल का एक लड़का खुद को 'मार्शल आर्ट कोच' कह रहा है। जरा सोचिए, जिस विद्या को समझने में, जिसके दर्शन (Philosophy) को जीने में और जिसके तकनीकों में पारंगत होने में एक व्यक्ति को कम से कम 15 साल की तपस्या लगती है, वहां एक कल का बच्चा ...