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सादगी की मिसाल: जब भारत के राष्ट्रपति की बेटी ने गुमनामी में निभाया अपना कर्तव्य

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सादगी की मिसाल: जब राष्ट्रपति की बेटी ने गुमनामी में निभाया अपना कर्तव्य आज के दौर में जहाँ जरा सी शक्ति या पद मिलते ही लोग उसका प्रदर्शन करने से नहीं चूकते, वहीं हमारे बीच कुछ ऐसे भी व्यक्तित्व हैं जो ऊँचे पदों पर रहकर भी ज़मीन से जुड़े रहे। यह कहानी है पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी की सुपुत्री स्वाति कोविंद की, जिन्होंने अपनी पहचान उजागर किए बिना वर्षों तक एक साधारण कर्मचारी की तरह काम किया। विदेशी प्रशंसा बनाम भारतीय वास्तविकता अक्सर हमारा मीडिया पश्चिमी देशों के उदाहरणों की खूब चर्चा करता है। हमें याद है कि जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की बेटी एक रेस्टोरेंट में काम कर रही थीं, तो भारतीय मीडिया सहित दुनिया भर ने उनके संस्कारों की सराहना की थी। निश्चित रूप से, वह तारीफ के काबिल था। लेकिन विडंबना यह है कि हमारे अपने देश में भी संस्कारों की ऐसी ही एक गौरवशाली मिसाल मौजूद थी, जिससे दुनिया लंबे समय तक अनजान रही। कौन हैं स्वाति कोविंद? लगभग 5.4 फीट की कद-काठी वाली स्वाति कोविंद कई वर्षों से एयर इंडिया में एक फ्लाइट अटेंडेंट (क्रू मेंबर) के रूप में कार...

मनोरंजन के नाम पर माता-पिता का अपमान: कहां जा रहा हमारा समाज?

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   मनोरंजन के नाम पर माता-पिता का अपमान: कहां जा रहा हमारा समाज? मनोरंजन और हास्य समाज में सकारात्मकता लाने के लिए होते हैं, लेकिन जब यह मर्यादा की सीमाएं लांघने लगे, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। हाल ही में एक टीवी शो में माता-पिता के प्रति घिनौने शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसने न केवल संस्कारों का अपमान किया बल्कि लाखों दर्शकों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई। क्या यह सही है? हमारे भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। वे न केवल हमारे जीवन के आधार होते हैं, बल्कि हमारे चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में, सार्वजनिक मंच पर उनका अपमान किया जाना न केवल अनुचित है बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है। मनोरंजन बनाम मर्यादा आजकल कई टीवी शो टीआरपी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वे हास्य और व्यंग्य के नाम पर व्यक्तिगत और सामाजिक मूल्यों का मज़ाक उड़ाने में भी हिचकिचाते नहीं हैं। अभद्र भाषा और अमर्यादित संवादों को सिर्फ एक "जोक" कहकर टाल देना, समाज में नकारात्मकता फैलाने का ही एक तरीका बन गया है। दर्शकों की भूमिका हमारे पास सबसे बड़ी ताक...

मोदी जी ने वाशिंगटन डीसी में अनेक बड़ी हस्तियों से मुलाक़ात की- मस्क, विवेक रामास्वामी सुंदर पिचाई आदि के अतिरिक्त तुलसी गबार्ड जो अब अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी में अहम कार्यपद पर है आदि से भी उन्होंने गर्मजोशी से मुलाक़ात की- तस्वीरें चित्त प्रसन्न करने वाली थीं

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  मोदी जी ने वाशिंगटन डीसी में अनेक बड़ी हस्तियों से मुलाक़ात की- मस्क, विवेक रामास्वामी सुंदर पिचाई आदि के अतिरिक्त तुलसी गबार्ड जो अब अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी में अहम कार्यपद पर है आदि से भी उन्होंने गर्मजोशी से मुलाक़ात की- तस्वीरें चित्त प्रसन्न करने वाली थीं। महाशय ट्रम्प से श्री मोदी जी की लंबी मुलाक़ात चली- प्रेस कांफ्रेंस आदि भी हुई। अच्छी डिप्लोमेटिक गर्मजोशी से हुई मुलाक़ात में नमस्ते ट्रम्प और हाउडी मोदी जी की स्मृतियाँ ताज़ा हुईं- दोनों राजनेताओं ने अपनी दोस्ती का एक दूसरे को वास्ता दिया। लाइव टीवी पर दोनों को ये वार्तालाप करते देखना सुखद रहा। वैसे अनेक डील्स आदि मुकम्मल हुए हैं किंतु कुछ अहम पहलू हैं जो ध्यान देने लायक़ हैं- पहला- महाशय ट्रम्प जी ने भारत को फ़ौजी संसाधन बेचने ख़ास तौर पर लड़ाकू विमान आदि की बात कही। भारत को अपने माल बेचने पर अमेरिका ने कहीं कोई कोताही नहीं बरती। हालाँकि मोदी जी ने भी कुशलता से काफ़ी कुछ व्यापारिक और राजनीतिक दाँवपेंच खेले- जो आम मीडिया में मिल जाएँगे। दूसरा- मुंबई हमले का साज़िशकर्ता तहव्वुर राना अब भारत लाया जाएगा- ट्रम्प ने इस फ़ैसले प...