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Self-Defense या सिर्फ दिखावा? एक सीधी बात

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सुनने में थोड़ा कड़वा लगेगा, लेकिन कहना ज़रूरी है। आजकल “Self-Defense” के नाम पर जो सिखाया जा रहा है, उसमें से काफी चीजें असल में Self-Defense नहीं हैं। वो सिर्फ दिखावा है… या यूं कहें कि कैमरे के लिए बनाई गई एक्टिंग है। आपने भी देखा होगा— एक आदमी धीरे-धीरे हाथ बढ़ाता है, दूसरा आराम से उसका हाथ पकड़ता है, फिर 3-4 स्टेप में उसे गिरा देता है। सब कुछ इतना साफ और smooth होता है कि देखने वाले को लगता है—“बस, यही सीखना है।” लेकिन एक सवाल है— क्या असली हमलावर भी ऐसे ही आएगा असली दुनिया में क्या होता है? सड़क पर, किसी गली में, या अचानक हुए हमले में— कोई आपको पहले से बताता नहीं है कोई धीरे-धीरे हमला नहीं करता और सबसे जरूरी—कोई आपके साथ cooperate नहीं करता वहाँ सब कुछ उल्टा होता है। हमला अचानक होता है, तेज होता है, और कई बार एक से ज्यादा लोग भी हो सकते हैं। आपको सोचने का मौका तक नहीं मिलता। तो फिर सवाल उठता है— जो चीजें हम इतनी आराम से सीख रहे हैं, क्या वो उस हालत में काम आएंगी यहाँ सबसे बड़ा धोखा होता है समस्या ये नहीं है कि लोग कुछ सीख रहे हैं। समस्या ये है कि लोग गलत चीज को सही सम...