मधु किश्वर से स्नूपगेट तक: आरोप, राजनीति और सच्चाई का पूरा विश्लेषण



मधु किश्वर जी ने ब्रांड मोदी के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन उन्हें कोई #प्रसाद नहीं मिला। 
 मधु किश्वर का गुस्सा होना बनता था, लेकिन इस हद तक below the belt.....??
वो विरोधी बन गईं। इन्होंने ब्रांड मोदी को बहुत बनाया लेकिन इन्हें कुछ नहीं मिला तो अब डीब्रांड करने में जुट गई हैं! मोदी की दाद देनी होगी। मौन रहकर इन्हें और स्वामी को चित्त कर रखा है। 
बोलते रहो। राजनीति में #मौन भी कम मारक हथियार नहीं होता। नरसिंहा राव साहब ने इसका खूब इस्तेमाल किया। आतंकवादी दरगाह में घुस गए और लगे प्रेशर बनाने। राव साहब चुप रहे। पड़े रहो सालों। एक दिन उबिया कर आतंकी सब छोड़छाड़ कर भाग गए! मोदी भी इसी दांव से अपने पार्टी के आंतरिक आतंकियों के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। बोलते रहो। लिखते रहो।
मधु किश्वर के आरोप निराधार और #बिलो_द_बेल्ट लगते हैं। 

ऐसे ही #एक_पुराने मामले के संदर्भ में chat GPT से जानकारी मांगी गई, तो उसका कहना था कि वह मामला थोड़ा जटिल है। सोशल मीडिया पर अक्सर आधे-अधूरे या गलत दावों के साथ फैलाया जाता है।

इसे आमतौर पर “गुजरात स्नूपिंग कांड” या “साहेब–स्नूपगेट” कहा गया।

#आरोप क्या थे?

2013 में कुछ ऑडियो टेप सामने आए (जिन्हें मीडिया पोर्टल Cobrapost और Gulail ने प्रकाशित किया)

आरोप था कि गुजरात पुलिस एक युवती (आर्किटेक्ट) की निगरानी (फोन, मूवमेंट आदि) कर रही थी....

यह निगरानी कथित तौर पर 
“साहेब” के निर्देश पर हो रही थी..
विपक्ष ने “साहेब” को उस समय के मुख्यमंत्री Narendra Modi से जोड़ा....

प्रदीप शर्मा (IPS) उस समय पहले से सरकार से विवाद में चल रहे अधिकारी थे...उन्होंने आरोप लगाया कि जिस युवती की निगरानी हुई, वह उन्हें जानती थी। और यह पूरा मामला राजनीतिक/व्यक्तिगत कारणों से किया गया...

लेकिन (ध्यान दें..) वे सीधे “स्नूपिंग के ऑपरेशन के अधिकारी” नहीं थे। बल्कि बाद में सामने आकर आरोप लगाने वालों में शामिल हुए।

 #सरकार_का_पक्ष क्या था?

गुजरात सरकार ने कहा...यह निगरानी युवती के पिता के अनुरोध पर की गई थी...सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया...
 बाद में युवती के पिता ने भी सार्वजनिक रूप से यही कहा कि उन्होंने सुरक्षा के लिए कहा था।

#जांच क्या हुई ?

राज्य स्तर पर...
गुजरात सरकार ने एक जांच आयोग बनाया

केंद्र स्तर पर 
उस समय केंद्र में United Progressive Alliance (UPA) सरकार थी
उसने भी अलग जांच की बात कही।

 लेकिन यह मामला कभी किसी निर्णायक कोर्ट फैसले तक नहीं पहुंचा। कोई आपराधिक दोष (conviction) इस केस में साबित नहीं हुआ।

प्रदीप शर्मा को “10 साल की जेल” हुई...
उन्हें सजा/गिरफ्तारी हुई थी भ्रष्टाचार और जमीन (land allotment) से जुड़े मामलों में...पद के दुरुपयोग के आरोप
उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया...कुछ मामलों में सजा भी हुई.... प्रदीप शर्मा अलग-अलग मामलों में जेल गए और जमानत पर बाहर भी आए...वे लगातार कानूनी लड़ाइयाँ लड़ते रहे।


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