मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार

मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार 

नासा
आर्टेमिस 2: वो मिशन जो इंसानी कदमों को चांद के और करीब ले जाएगा
इंसानियत एक बार फिर सितारों को छूने की दहलीज पर है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर खड़ा दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट एसएलएस यानी स्पेस लॉन्च सिस्टम दहाड़ने के लिए तैयार है। यह सिर्फ एक रॉकेट नहीं, बल्कि अरबों लोगों के सपनों की उड़ान है।
आर्टेमिस 2 क्यों खास है?
यह मिशन अपोलो युग की यादों को ताजा करने वाला है, लेकिन नई तकनीक और नए जज्बे के साथ। 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा के इतने करीब जाएगा। 322 फीट ऊंचे इस रॉकेट की ताकत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि यह लॉन्च के वक्त लाखों पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है। यह मिशन आर्टेमिस 3 के लिए रिहर्सल है, जिसमें इंसान वास्तव में चांद की सतह पर उतरेगा।
अंतरिक्ष के चार जांबाज
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होंगे। ये वो लोग हैं जो भविष्य के मंगल मिशन की राह आसान करेंगे। इसमें पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री चांद की यात्रा कर इतिहास रचेंगे।
घर बैठे कैसे देखें लाइव?
अगर आप भी इस ऐतिहासिक पल को लाइव देखना चाहते हैं, तो आप नासा की आधिकारिक वेबसाइट, उनके यूट्यूब चैनल या नासा ऐप पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं। इसके अलावा नासा के सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी इसकी पल-पल की जानकारी उपलब्ध रहेगी।

मिशन के मुख्य तथ्य
इस मिशन की अवधि लगभग 10 दिन की होगी। अंतरिक्ष यान चांद की सतह से महज 10,300 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। इस पूरे मिशन का मुख्य लक्ष्य गहरे अंतरिक्ष में इंसानी जीवन की सुरक्षा और तकनीकों की जांच करना है।
निष्कर्ष
आर्टेमिस 2 केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक वादा है कि हम चांद पर केवल झंडा गाड़ने नहीं, बल्कि वहां रहने और शोध करने जा रहे हैं। तो तैयार हो जाइए, क्योंकि ब्रह्मांड का अगला अध्याय लिखा जाने वाला है। नासा का कहना है कि हम चांद की ओर जा रहे हैं, लेकिन हमारी नजरें मंगल पर टिकी हैं।
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