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जब राम की निकटता पाने के लिए हनुमान ने पूरे शरीर पर लगा लिया सिंदूर

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रामायण के अनंत प्रसंगों में हनुमान जी की भक्ति के कई रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन 'सिंदूर' वाला यह प्रसंग उनकी मासूमियत और प्रभु के प्रति उनके अनन्य प्रेम की पराकाष्ठा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जब भक्ति चरम पर होती है, तो तर्क और पांडित्य गौण हो जाते हैं। एकांत की मर्यादा और हनुमान का तर्क लंका विजय के पश्चात अयोध्या में उत्सव का माहौल था। श्रीराम का राज्याभिषेक हो चुका था। दरबार की व्यस्तताओं के बाद जब श्रीराम अपने निजी कक्ष में माता सीता और अपने भाइयों के साथ विश्राम के लिए आए, तो हनुमान जी भी उनके पीछे-पीछे चले आए। परिवार के अन्य सदस्य चाहते थे कि श्रीराम और माता सीता को कुछ समय एकांत में मिले। शत्रुघ्न जी ने संकेतों में हनुमान जी को जाने का आग्रह किया, लेकिन राम-नाम में रमे हनुमान भला मामूली संकेतों को कहाँ समझने वाले थे। अंततः जब उन्हें स्पष्ट कहा गया कि प्रभु को 'एकांत' चाहिए, तो हनुमान जी ने बड़ी मासूमियत से पूछा— "माता सीता भी तो यहीं हैं, फिर मुझे ही क्यों जाना चाहिए?" एक चुटकी सिंदूर का रहस्य तब शत्रुघ्न जी ने उन्हें समझा...

मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार

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मिशन मून: 50 साल बाद फिर इतिहास रचने को तैयार  नासा आर्टेमिस 2: वो मिशन जो इंसानी कदमों को चांद के और करीब ले जाएगा इंसानियत एक बार फिर सितारों को छूने की दहलीज पर है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर खड़ा दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट एसएलएस यानी स्पेस लॉन्च सिस्टम दहाड़ने के लिए तैयार है। यह सिर्फ एक रॉकेट नहीं, बल्कि अरबों लोगों के सपनों की उड़ान है। आर्टेमिस 2 क्यों खास है? यह मिशन अपोलो युग की यादों को ताजा करने वाला है, लेकिन नई तकनीक और नए जज्बे के साथ। 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा के इतने करीब जाएगा। 322 फीट ऊंचे इस रॉकेट की ताकत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि यह लॉन्च के वक्त लाखों पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है। यह मिशन आर्टेमिस 3 के लिए रिहर्सल है, जिसमें इंसान वास्तव में चांद की सतह पर उतरेगा। अंतरिक्ष के चार जांबाज इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होंगे। ये वो लोग हैं जो भविष्य के मंगल मिशन की राह आसान करेंगे। इसमें पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री चांद की यात्रा कर इतिहास रचेंगे। घर बैठे कै...

MI vs KKR: रोहित-रिकेल्टन का तूफान, बुमराह-शार्दुल का मैजिक... मुंबई इंडियंस की जीत के 5 कारण

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MI vs KKR: रोहित-रिकेल्टन का तूफान, बुमराह-शार्दुल का मैजिक मुंबई इंडियंस की जीत के 5 बड़े कारण इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में रविवार को मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच रोमांचक मुकाबला खेला गया। इस मैच में मुंबई इंडियंस ने 6 विकेट से शानदार जीत दर्ज की। साल 2012 के बाद यह पहला मौका है जब मुंबई इंडियंस ने अपने पहले ही मैच में जीत हासिल की है। आइए जानते हैं इस शानदार जीत के 5 मुख्य कारण: 1. रोहित शर्मा की तूफानी बल्लेबाजी रोहित शर्मा ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज़ अपनाया। उन्होंने मात्र 23 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और 38 गेंदों में 78 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 6 छक्के लगाए और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। रोहित और रिकेल्टन के बीच पहले विकेट के लिए 148 रनों की साझेदारी मैच का टर्निंग पॉइंट रही। 2. रिकेल्टन की दमदार पारी रेयान रिकेल्टन ने टीम में मौका मिलते ही खुद को साबित किया। उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 43 गेंदों में 81 रन बनाए, जिसमें 8 छक्के शामिल थे। रोहित के आउट होने के बाद उन्होंने जिम्मेदारी संभाली और टीम को जी...

ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट: शक्ति, अनुशासन और आत्मरक्षा का संगम

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ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट: शक्ति, अनुशासन और आत्मरक्षा का संगम आज के बदलते परिवेश में जहाँ सुरक्षा और आत्मविश्वास जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं, मार्शल आर्ट्स का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाती है। इसी उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया है — 'ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट', जो समाज में आत्मरक्षा और अनुशासन की एक नई दिशा प्रदान कर रहा है। एक नया आयाम और अगला स्तर (Our Mission) ज्वाला टेंपल ऑफ मार्शल आर्ट का मुख्य उद्देश्य मार्शल आर्ट्स को एक नया आयाम देना और इसे अगले स्तर (Next Level) पर स्थापित करना है। हमारा लक्ष्य इस प्राचीन और गौरवशाली विधा को केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित न रखकर, इसे एक पेशेवर और वैज्ञानिक पद्धति के रूप में विकसित करना है। हम मार्शल आर्ट्स की परिभाषा को आधुनिक तकनीकों और गहरी आध्यात्मिक समझ के साथ जोड़कर इसे एक ऐसी ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं, जहाँ हर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार हो। ...

मधु किश्वर से स्नूपगेट तक: आरोप, राजनीति और सच्चाई का पूरा विश्लेषण

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मधु किश्वर जी ने ब्रांड मोदी के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन उन्हें कोई #प्रसाद नहीं मिला।   मधु किश्वर का गुस्सा होना बनता था, लेकिन इस हद तक below the belt.....?? वो विरोधी बन गईं। इन्होंने ब्रांड मोदी को बहुत बनाया लेकिन इन्हें कुछ नहीं मिला तो अब डीब्रांड करने में जुट गई हैं! मोदी की दाद देनी होगी। मौन रहकर इन्हें और स्वामी को चित्त कर रखा है।  बोलते रहो। राजनीति में #मौन भी कम मारक हथियार नहीं होता। नरसिंहा राव साहब ने इसका खूब इस्तेमाल किया। आतंकवादी दरगाह में घुस गए और लगे प्रेशर बनाने। राव साहब चुप रहे। पड़े रहो सालों। एक दिन उबिया कर आतंकी सब छोड़छाड़ कर भाग गए! मोदी भी इसी दांव से अपने पार्टी के आंतरिक आतंकियों के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। बोलते रहो। लिखते रहो। मधु किश्वर के आरोप निराधार और #बिलो_द_बेल्ट लगते हैं।  ऐसे ही #एक_पुराने मामले के संदर्भ में chat GPT से जानकारी मांगी गई, तो उसका कहना था कि वह मामला थोड़ा जटिल है। सोशल मीडिया पर अक्सर आधे-अधूरे या गलत दावों के साथ फैलाया जाता है। इसे आमतौर पर “गुजरात स्नूपिंग कांड” या “...

आपकी ज़िंदगी में ऐसा कौन सा लम्हा या इंसान है जिसकी आप सबसे ज़्यादा कदर करते हैं? हमें कमेंट्स में बताएं।"

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      आपकी ज़िंदगी में ऐसा कौन सा लम्हा या इंसान है जिसकी आप सबसे ज़्यादा कदर करते हैं?      हमें कमेंट्स में बताएं।" #Rishte #Kadar #Feelings #Humanity #TrueLines #EmotionalPost #HeartTouching#LifeLessons #HindiQuotes #AppreciateWhatYouHave #ValuingTime

मार्शल आर्ट की हत्या: क्या हम 'खेल' के नाम पर एक प्राचीन विद्या को खो रहे हैं?

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लेखक: किशोर प्रजापति  संस्था: ज्वाला टेम्पल ऑफ मार्शल आर्ट (Jwala Temple Of Martial Art) आदरणीय सरकार और खेल नीति निर्धारकों, आज मैं एक मार्शल आर्ट कोच के रूप में, एक ऐसे कड़वे सच को सामने रखना चाहता हूँ जिसे अक्सर मेडल और ट्राफियों की चमक के पीछे छुपा दिया जाता है। यह गुजारिश सिर्फ़ मेरी नहीं, बल्कि उस हर सच्चे साधक की है जिसने अपनी जवानी के 15-20 साल इस कला को सीखने में खपा दिए हैं। मेरी सरकारों से एक सीधी और स्पष्ट माँग है: कृपया 'मार्शल आर्ट' को 'खेलों' (Sports) की श्रेणी से बाहर निकाल दीजिए और मार्शल आर्ट को बचा लीजिए। समस्या क्या है? आज हम एक अजीब दौर में जी रहे हैं। गली-गली में मार्शल आर्ट अकादमियाँ खुल रही हैं, लेकिन वहां मार्शल आर्ट नहीं, सिर्फ 'खेल' सिखाया जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज 17 या 18 साल का एक लड़का खुद को 'मार्शल आर्ट कोच' कह रहा है। जरा सोचिए, जिस विद्या को समझने में, जिसके दर्शन (Philosophy) को जीने में और जिसके तकनीकों में पारंगत होने में एक व्यक्ति को कम से कम 15 साल की तपस्या लगती है, वहां एक कल का बच्चा ...

हम सब जानते हैं कि जिंदगी बेहद कठिन है। हमारे लक्ष्य और सपनों को लेकर बनाई गई बेहतरीन योजनाएँ अक्सर धरी-की-धरी रह जाती हैं

हम सब जानते हैं कि जिंदगी बेहद कठिन है। हमारे लक्ष्य और सपनों को लेकर बनाई गई बेहतरीन योजनाएँ अक्सर धरी-की-धरी रह जाती हैंहम सब जानते हैं कि जिंदगी बेहद कठिन है। हमारे लक्ष्य और सपनों को लेकर बनाई गई बेहतरीन योजनाएँ अक्सर धरी-की-धरी रह जाती हैं। इस लिहाज से, हर शख्स के अंदर दो गुण अवश्य होने चाहिए, जो उसकी इच्छा और सफलता की चाहत में शुरू हुए सफर को जारी रख सके। ये दो गुण हैं-वचनबद्धता और दृढ़ता। आपके अंदर लक्ष्य पर खुद को केंद्रित रखने को लेकर उचित वचनबद्धता और उस दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहने की निरंतरता बरकरार रहनी चाहिए। इसके बाद आपके अंदर दृढ़ता होनी चाहिए, जो सफलता के सफर में आपके जीवन में निश्चित रूप से आनेवाली परेशानियों और झटकों से निपटने में आपकी, मदद करे।   #new

तलवे चाटना: एक अद्भुत कला या खेल व्यवस्था पर कलंक

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"तलवे चाटना: एक अद्भुत कला या खेल व्यवस्था पर कलंक?" ✍️ लेखक - किशोर प्रजापति  भारत में खेलों की दुनिया दिन-ब-दिन आगे बढ़ रही है। एथलीट्स अंतरराष्ट्रीय पदक ला रहे हैं, देश का नाम रोशन कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे एक ऐसा काला सच छिपा है, जिस पर आज भी चर्चा करना एक ‘जोखिम’ जैसा लगता है। हम बात कर रहे हैं – ‘तलवे चाटने’ की संस्कृति की, जिसे आप चाहें तो "Yes Man स्पोर्ट्स स्किल" कह सकते हैं। 🎭 तलवे चाटना: एक कला, एक रणनीति, एक अनकहा सत्य यह कहना गलत नहीं होगा कि आजकल कई जगहों पर खेल कौशल से ज़्यादा संबंध कौशल मायने रखने लगा है। मैदान में कड़ी मेहनत करने वाले खिलाड़ियों को किनारे किया जाता है। जबकि 'सर, नमस्ते' और 'सब बढ़िया है सर' कहने वाले चेहरों को मंच, मीडिया और मैडल मिल जाते हैं। एक नया वर्ग बन गया है, जो खेल का अभ्यास नहीं करता, बल्कि "संबंधों की गर्मी" से पसीना बहाता है। इसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे ‘तलवे चाटना’ एक अनौपचारिक खेल इवेंट है—जिसका अभी तक बस मंत्रालय की सूची में नाम नहीं जुड़ा। 📉 खिलाड़ियों की असली चुनौती: विरोध ...

5वीं इंडिया इंटरनेशनल किक बॉक्सिंग टूर्नामेंट, दिल्ली में भीनमाल के खिलाड़ियों की ऐतिहासिक उपलब्धि

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 दिल्ली में आयोजित 5वीं इंडिया इंटरनेशनल किक बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भीनमाल के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भीनमाल से भाग लेने वाले तीन खिलाड़ियों में से धनुष्री सोलंकी एवं यज्ञा जैन ने उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय देते हुए कांस्य पदक प्राप्त किया। यह उपलब्धि भीनमाल सहित पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता उनके निरंतर परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है। सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाया और यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। इस सफलता के पीछे कोच किशोर प्रजापति का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने खिलाड़ियों को तकनीकी प्रशिक्षण, मानसिक मजबूती और प्रतियोगी भावना के साथ तैयार किया। उनके मार्गदर्शन में संचालित ज्वाला टेम्पल ऑफ मार्शल आर्ट लगातार क्षेत्र की प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने का कार्य कर रही है। अकादमी का उद्देश्य केवल पद...

प्राचीन ग्रंथों में अस्त्रों से बचाव की तकनीकें उतनी ही उन्नत बताई गई हैं जितने कि स्वयं अस्त्र थे। इसे 'प्रत्यस्त्र' (Counter-Astra) या रक्षात्मक युद्धनीति कहा जाता था।

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प्राचीन ग्रंथों में अस्त्रों से बचाव की तकनीकें उतनी ही उन्नत बताई गई हैं जितने कि स्वयं अस्त्र थे। इसे 'प्रत्यस्त्र' (Counter-Astra) या रक्षात्मक युद्धनीति कहा जाता था। यह केवल ढाल के पीछे छिपना नहीं था, बल्कि यह आने वाली ऊर्जा (तरंग) को दूसरी ऊर्जा से काटकर बेअसर करने का विज्ञान था। यहाँ कुछ प्रमुख प्राचीन रक्षा तकनीकें और उनकी आधुनिक विज्ञान से तुलना दी गई है: 1. प्रत्यस्त्र सिद्धांत (The Concept of Interceptors) युद्ध में नियम था कि हर अस्त्र का एक "काट" (Counter) होता था। एक विशिष्ट आवृत्ति (Frequency) की तरंग को शांत करने के लिए विपरीत प्रकृति की तरंग छोड़ी जाती थी।  * वरुणास्त्र बनाम आग्नेयास्त्र :    जब कोई आग्नेयास्त्र (Fire/Heat weapon) चलाता था, तो उसे रोकने के लिए वरुणास्त्र (Water/Cooling weapon) का प्रयोग होता था।    * आधुनिक तुलना : यह आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400 या Iron Dome) जैसा है। जैसे ही रडार दुश्मन की मिसाइल (ऊर्जा) को आते देखता है, वह उसे हवा में ही नष्ट करने के लिए अपनी 'एंटी-मिसाइल' छोड़ देता है। 2. ब्...

राजस्थान में खेलों की मान्यता पर सवाल — जब भारत के पूर्व खेल मंत्री के राज्य में ही खिलाड़ी बेमान्यता के शिकार

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राजस्थान में खेलों की मान्यता पर सवाल — जब भारत के पूर्व खेल मंत्री के राज्य में ही खिलाड़ी बेमान्यता के शिकार हमारा ब्लॉग देखे किशोर प्रजापति भारत जैसे विशाल राष्ट्र में खेल न केवल शारीरिक क्षमता का प्रतीक हैं, बल्कि एकता, अनुशासन और राष्ट्रगौरव का प्रतीक भी हैं। लेकिन आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि  जिस खेल को भारत सरकार मान्यता देती है, वह राजस्थान में “बिना मान्यता” का शिकार कैसे हो गया? क्या यह केवल एक प्रशासनिक भूल है, या खिलाड़ियों के भविष्य से किया गया अन्याय?  जब केंद्र मान्यता देता है, तो राज्य क्यों नहीं मानता? भारत सरकार के युवा एवं खेल मंत्रालय ने देशभर में अनेक खेलों को आधिकारिक मान्यता दे रखी है  इनमें वे खेल भी शामिल हैं जिनमें राजस्थान के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं। फिर सवाल उठता है  अगर वही खेल भारत स्तर पर मान्य है, तो राजस्थान में उसे "गैर-मान्यता प्राप्त" कहकर खिलाड़ियों का भविष्य क्यों रोका जा रहा है? क्या राजस्थान भारत से अलग कोई व्यवस्था चला रहा है? या फिर यह राज्य की खेल नीतियों में किसी गहरी असमानता ...

भारतीय खेल: राजनीति और भ्रष्टाचार की कैद में

 

मात्र 23 वर्ष की उम्र मेदुर्दांत #मुस्लिम आतंकियोंसे भिड़कर अपनी जान देकर350 से अधिक लोगों कीजान बचाने वाली वीरांगना#नीरजाभनोट की #पुण्यतिथीपर #कोटि #कोटि #नमन।

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मात्र 23 वर्ष की उम्र मे दुर्दांत #मुस्लिम आतंकियों से भिड़कर अपनी जान देकर 350 से अधिक लोगों की जान बचाने वाली वीरांगना #नीरजाभनोट की #पुण्यतिथी पर #कोटि #कोटि #नमन। नीरजा को भारत का वीरता का #सर्वोच्च #नागरिक #सम्मान #अशोकचक्र,पकिस्तान का #तमगाएइंसानियत और अमेरिका का #जस्टिसफॉरक्राइम अवार्ड  मिला और पूरे विश्व में इनको हाइजैक गर्ल के नाम से जाना जाता है। 5 सितम्बर 1986 को भारत की एक विरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 350 यात्रियों की जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भारत के कितने नवयुवक और नवयुवतियां उसका नाम जानते है। ??😢 कैटरिना कैफ,करीना कपूर, प्रियंका चोपडा ,दीपिका पादुकोण,विद्याबालन और अब तो सनी लियोन जैसा बनने की होड़ लगाने वाली #युवतियां क्या नीरजा भनोत का नाम जानती है। नहीं सुना न ये नाम। मैं बताता हूँ इस महान विरांगना के बारे में। 7 सितम्बर 1964 को चंड़ीगढ़ के हरीश भनोत जी के यहाँ जब एक बच्ची का जन्म हुआ था तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान इस बच्ची को मिलेगा। बचपन से ही इस बच्ची को वायुयान में बैठने और आकाश में उड़ने...

कोच: खेल व्यवस्था का भूला हुआ योद्धा

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कोच: खेल व्यवस्था का भूला हुआ योद्धा kishor Prajapati खेलों की दुनिया में जब कोई खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पदक लेकर देश का नाम रोशन करता है, तब पूरा देश उसकी जय-जयकार करता है। अख़बारों की सुर्खियों में उसका नाम छपता है, पुरस्कार और सम्मान की बौछार होती है। लेकिन उस चमकते हुए पदक के पीछे खड़ा एक चेहरा ऐसा भी है, जिसे न तो अख़बार की सुर्खियाँ मिलती हैं, न ही समाज का सम्मान — और वह है कोच। कोच की अनदेखी हकीकत कोच वह व्यक्ति है, जो गली-गांव से बच्चों को चुनता है, उन्हें खेल की बुनियादी शिक्षा देता है, अनुशासन और समर्पण सिखाता है। वह वर्षों तक अपने व्यक्तिगत त्याग, मेहनत और सीमित साधनों के बावजूद खिलाड़ियों को तैयार करता है। लेकिन विडंबना यह है कि खेल व्यवस्था में सबसे ज्यादा शोषण और अपमान का शिकार भी वही कोच होता है। जब खिलाड़ी सफल होता है, तो उसकी चमक के पीछे कोच का नाम दब जाता है। अगर कोई कोच सिस्टम की गलतियों पर बोलने की हिम्मत करता है, तो उसके करियर पर ताला लग जाता है। पुरस्कार और पहचान की सूची में खिलाड़ी का नाम होता है, लेकिन कोच अक्सर गुमनाम रह जाता है। एक मौन संघर्ष...

खेल भावना और प्रतिभा का संगम : चिल्ड्रन एंड कैडेट्स नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2025

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खेल भावना और प्रतिभा का संगम : चिल्ड्रन एंड कैडेट्स नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2025 चेन्नई खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और आत्मविकास का रास्ता है। इसका सजीव उदाहरण चेन्नई में चल रही चिल्ड्रन एंड कैडेट्स नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2025 में देखने को मिल रहा है। पाँच दिवसीय इस आयोजन ने न केवल बच्चों और किशोर खिलाड़ियों की ऊर्जा को सामने रखा, बल्कि यह भी साबित किया कि आने वाली पीढ़ी भारतीय मार्शल आर्ट्स और किक बॉक्सिंग को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी। मुकाबलों की रौनक और खिलाड़ियों का जज्बा दूसरे दिन जब इंडोर स्टेडियम का माहौल खेलभावना से गूंज रहा था, तब 550 से अधिक मुकाबलों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। हर बाउट में खिलाड़ियों ने दमदार तकनीक, फुर्ती और धैर्य का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने साबित किया कि भारतीय खेल प्रतिभा किसी से कम नहीं है। छोटे-छोटे आयु वर्ग के खिलाड़ी भी जिस आत्मविश्वास और निडरता से रिंग में उतरे, वह भारतीय खेल संस्कृति की मजबूती को दिखाता है। अब तक 900 मुकाबले सम्पन्न हो चुके हैं और लगभग 50 अंतरराष्ट्र...

"मदन प्रजापत प्रकरण: लोकतंत्र के स्तंभ को ठेस या सत्ता का अहंकार

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जनप्रतिनिधि के अपमान पर चुप क्यों है प्रशासन? 📍 स्थान: राजस्थान – बालोतरा 🗓️ तिथि: 21/07/2025 --- लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को बुलंद करने वाले जनप्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोपरि होता है। लेकिन हाल ही में राजस्थान के बालोतरा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री मदन प्रजापत के साथ जो घटनाक्रम हुआ, वह लोकतंत्र की मर्यादा और सरकारी तंत्र की भूमिका दोनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। सूत्रों के अनुसार, एक सरकारी कर्मचारी द्वारा श्री मदन प्रजापत जी के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। यह न केवल अमर्यादित और अपमानजनक है, बल्कि यह सरकारी प्रशासन में व्याप्त राजनीतिक पक्षपात और अहंकार की झलक भी देता है। --- 🔍 इस मुद्दे पर उठते हैं कई सवाल: क्या एक सरकारी कर्मचारी को यह अधिकार है कि वह एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि से इस तरह से बात करे? क्या यह लोकतंत्र की आत्मा के साथ खिलवाड़ नहीं है? क्या वर्तमान सरकार ऐसे अधिकारियों को शह दे रही है जो जनप्रतिनिधियों का अपमान कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं? --- ⚖️ लोकतंत्र का स्तंभ – जनप्रतिनिधि जनता अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर जनप्र...

रायपुर में गुंजन सोढा का जलवा: राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा

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 स्थान: रायपुर, छत्तीसगढ़  तिथि: 20 जुलाई 2025 भीनमाल / जालौर गुंजन सोढा ने राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर राजस्थान का नाम रोशन किया रायपुर (छत्तीसगढ़) में 16 से 20 जुलाई 2025 तक आयोजित राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता में राजस्थान की प्रतिभाशाली खिलाड़ी गुंजन सोढा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर राज्य और क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया। प्रतियोगिता का आयोजन WAKO India Kickboxing Federation द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से सैकड़ों खिलाड़ियों ने भाग लिया। गुंजन सोढा ने किक लाइट कैटेगरी (आयु वर्ग 21 से 40 वर्ष) में हिस्सा लिया और दमदार मुकाबलों के बाद सेमीफाइनल तक पहुँचकर पदक अपने नाम किया। गुंजन के प्रदर्शन में उनकी मेहनत, लगन और जुझारूपन साफ दिखाई दिया। इस सफलता के पीछे राजस्थान टीम के कोच श्री पुष्पेंद्र गुर्जर का भी अहम मार्गदर्शन रहा, जिनके नेतृत्व में राजस्थान की टीम ने प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। इस उपलब्धि पर गुंजन के परिवार, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह सफल...

पुष्पेंद्र गुर्जर: राजस्थान में किक बॉक्सिंग आंदोलन के अग्रदूत

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पुष्पेंद्र गुर्जर: राजस्थान किक-बॉक्सिंग के प्रेरणादायक अगुवा परिचय राजस्थान में किक-बॉक्सिंग के संगठित और सशक्त विकास में अग्रणी भूमिका निभाने वालों में श्री पुष्पेंद्र गुर्जर का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे राजस्थान किक-बॉक्सिंग संघ के महासचिव और WAKO India Kickboxing Federation के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हैं। एक समर्पित खिलाड़ी, प्रशिक्षक और तकनीकी अधिकारी के रूप में उन्होंने इस खेल को जमीनी स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। 🏅 खिलाड़ी से तकनीकी प्रतिनिधि तक की यात्रा भरतपुर जिले के बयाना (भीमनगर) निवासी पुष्पेंद्र गुर्जर ने किक-बॉक्सिंग में अपने करियर की शुरुआत एक कुशल खिलाड़ी के रूप में की। 2015 में आयोजित एशियन किक-बॉक्सिंग चैंपियनशिप (एशिया स्तरीय प्रतियोगिता) में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के लिए गौरव बढ़ाया। 2022 में वे एक बार फिर एशियन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए। 🛡️ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी प्रतिनिधित्व श्री पुष्पेंद्र गुर्जर को WAKO (World Association of Kickboxing Organ...

गली-गली घूमते विश्वविजेता जब खेल सर्टिफिकेट से चलता है”

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🥋🎭 गली-गली घूमते “चैंपियन” और खेल का शव! For more YouTube "<h2>तथाकथित विश्वविजेता: मार्शल आर्ट में दिखावे का खेल और समाज की चुप्पी</h2> <p><em>🥋 गली-गली 'विश्वविजेता' घूम रहे हैं – लेकिन जीत कहां है?</em></p> <p>आजकल हर मोहल्ले में कुछ ऐसे "मार्शल आर्ट विश्व चैंपियन" मिल जाते हैं, जिनके गले में 4 मेडल, हाथ में 5 सर्टिफिकेट और कैमरे में विधायक जी के साथ फोटो होती है।</p> <hr/> <h3>🥇 दिखावे का दौर: सर्टिफिकेट से 'सम्मान' की भूख</h3> <p>ये तथाकथित चैंपियन हर हफ्ते एक नई प्रतियोगिता में भाग लेते हैं — जिनमें से आधी बिना किसी मान्यता के होती हैं। फिर वो नेता जी के पास जाकर फोटो खिंचवाते हैं, और फेसबुक पर पोस्ट डालते हैं:</p> <blockquote>"विश्व विजेता बनने पर विधायक महोदय से आशीर्वाद प्राप्त हुआ 🙏"</blockquote> <h3>🤔 असली सवाल: क्या यह खेल को शर्मसार नहीं कर रहा?</h3> <p>मार्शल आर्ट अनुशासन, विनम्रता और तप का प्रतीक है। लेकिन ...